Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.96.57-58: इसी प्रकार कुरुवंश की स्त्रियाँ आईं और गांधारी देवी को उठा ले गईं। भाग्य और नियति को ही सबसे अधिक शक्तिशाली मानकर, राजा धृतराष्ट्र को बड़ा दुःख होने लगा। उनकी विवेक-शक्ति नष्ट हो गई। महातपस्वी राजा चिंता और शोक में डूब गए और मोह से ग्रस्त होकर उन्हें कुछ भी पता नहीं रहा। विदुर और संजय के परामर्श पर, राजा धृतराष्ट्र अचेतन की भाँति चुपचाप बैठ गए। 57-58 | mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथैवोत्थापयामासुर्गान्धारीं कुरुयोषित:।
स दैवं परमं मत्वा भवितव्यं च पार्थिव:॥ ५७॥
परां पीडां समाश्रित्य नष्टचित्तो महातपा:।
चिन्ताशोकपरीतात्मा न जज्ञे मोहपीडित:।
स समाश्वासितो राजा तूष्णीमासीद् विचेतन:॥ ५८॥
अनुवाद
इसी प्रकार कुरुवंश की स्त्रियाँ आईं और गांधारी देवी को उठा ले गईं। भाग्य और नियति को ही सबसे अधिक शक्तिशाली मानकर, राजा धृतराष्ट्र को बड़ा दुःख होने लगा। उनकी विवेक-शक्ति नष्ट हो गई। महातपस्वी राजा चिंता और शोक में डूब गए और मोह से ग्रस्त होकर उन्हें कुछ भी पता नहीं रहा। विदुर और संजय के परामर्श पर, राजा धृतराष्ट्र अचेतन की भाँति चुपचाप बैठ गए। 57-58
Similarly, the women of the Kuru clan came and picked up Gandhari Devi. Believing that fate and destiny were the most powerful, King Dhritarashtra began to feel great sorrow. His power of discrimination was lost. The great ascetic king was drowned in worry and grief and being afflicted with delusion, he was not aware of anything. On being counselled by Vidur and Sanjaya, King Dhritarashtra sat quietly as if unconscious. 57-58.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥