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mahabharat 8.96.55: इसी प्रकार दूरदर्शी देवी गांधारी भी गिर पड़ीं और युद्ध में कर्ण की मृत्यु के कारण जोर-जोर से विलाप करने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  8.96.55 
तथा सा पतिता देवी गान्धारी दीर्घदर्शिनी।
शुशोच बहुलालापै: कर्णस्य निधनं युधि॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार दूरदर्शी देवी गांधारी भी गिर पड़ीं और युद्ध में कर्ण की मृत्यु के कारण जोर-जोर से विलाप करने लगीं।
 
Similarly, the far-sighted goddess Gandhari also fell down and started lamenting loudly and mourning for the death of Karna in the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)