Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.96.49-50: राजेंद्र! सूतपुत्र कर्ण की मृत्यु के बाद नकुल-सहदेव, पांडु पुत्र भीमसेन, वृष्णि वंश के सर्वश्रेष्ठ सारथी सात्यकि, धृष्टद्युम्न और शिखंडी आदि पांडव, पांचाल और सृंजय योद्धा कुंतीकुमार अर्जुन की प्रशंसा करने लगे। 49-50॥ | mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नकुल: सहदेवश्च पाण्डवश्च वृकोदर:।
सात्यकिश्च महाराज वृष्णीनां प्रवरो रथ:॥ ४९॥
धृष्टद्युम्न: शिखण्डी च पाण्डुपाञ्चालसृञ्जया:।
पूजयन्ति स्म कौन्तेयं निहते सूतनन्दने॥ ५०॥
अनुवाद
राजेंद्र! सूतपुत्र कर्ण की मृत्यु के बाद नकुल-सहदेव, पांडु पुत्र भीमसेन, वृष्णि वंश के सर्वश्रेष्ठ सारथी सात्यकि, धृष्टद्युम्न और शिखंडी आदि पांडव, पांचाल और सृंजय योद्धा कुंतीकुमार अर्जुन की प्रशंसा करने लगे। 49-50॥
Rajendra! Nakul-Sahadeva, Pandu's son Bhimsen, the best charioteer of Vrishni dynasty, Satyaki, Dhrishtadyumna and Shikhandi etc. Pandavas, Panchal and Srinjaya warriors started praising Kuntikumar Arjun after the death of Suta's son Karna. 49-50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥