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mahabharat 8.96.48: महाराज! उस समय पाण्डव पक्ष के महारथी हर्ष में भरकर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर से मिले और उनका हर्ष बढ़ाने लगे॥48॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  8.96.48 
समेत्य च महाराज कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्।
हर्षयन्ति स्म राजानं हर्षयुक्ता महारथा:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय पाण्डव पक्ष के महारथी हर्ष में भरकर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर से मिले और उनका हर्ष बढ़ाने लगे॥48॥
 
Maharaj! At that time the great warriors of the Pandava side, filled with joy, met Yudhishthira, son of Kunti, and began to increase his joy. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)