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mahabharat 8.96.45: महाबाहो! हमने अत्यन्त दुःखी होकर तेरह वर्ष जागकर बिताए हैं। आपकी कृपा से आज रात हम सुखपूर्वक सो सकेंगे।॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  8.96.45 
त्रयोदश समास्तीर्णा जागरेण सुदु:खिता:।
स्वप्स्यामोऽद्य सुखं रात्रौ त्वत्प्रसादान्महाभुज॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! हमने अत्यन्त दुःखी होकर तेरह वर्ष जागकर बिताए हैं। आपकी कृपा से आज रात हम सुखपूर्वक सो सकेंगे।॥ 45॥
 
Mahabaho! Being very sad we have spent thirteen years awake. By your grace tonight we will be able to sleep peacefully.'॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)