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mahabharat 8.96.4: कुन्तीनन्दन! आओ, हम दोनों मिलकर आपके इस विश्वविख्यात एवं यशस्वी पराक्रम की कथा बुद्धिमान कुरुराज युधिष्ठिर से कहें॥4॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.96.4 
तमिमं विक्रमं लोके प्रथितं ते यशस्करम्।
निवेदयाव: कौन्तेय कुरुराजस्य धीमत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! आओ, हम दोनों मिलकर आपके इस विश्वविख्यात एवं यशस्वी पराक्रम की कथा बुद्धिमान कुरुराज युधिष्ठिर से कहें॥4॥
 
Kuntinandan! Come, let us both tell the story of this world-renowned and glorious bravery of yours to the wise Kuru King Yudhishthir. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)