Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.96.33-36: ऐसा कहकर महाबाहु नरसिंह धर्मराज युधिष्ठिर, मन के समान वेगवान श्वेतवर्ण और काली पूँछ वाले घोड़ों से जुते हुए स्वर्णमय रथ पर सवार होकर अपनी सेना के साथ युद्ध देखने के लिए चल पड़े। युद्धभूमि में दोनों वीर योद्धाओं श्रीकृष्ण और अर्जुन के साथ अपनी रुचि के विषय में विचार-विमर्श करते हुए युधिष्ठिर ने देखा कि महारथी कर्ण युद्धभूमि में सो रहे हैं। | mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा कहकर महाबाहु नरसिंह धर्मराज युधिष्ठिर, मन के समान वेगवान श्वेतवर्ण और काली पूँछ वाले घोड़ों से जुते हुए स्वर्णमय रथ पर सवार होकर अपनी सेना के साथ युद्ध देखने के लिए चल पड़े। युद्धभूमि में दोनों वीर योद्धाओं श्रीकृष्ण और अर्जुन के साथ अपनी रुचि के विषय में विचार-विमर्श करते हुए युधिष्ठिर ने देखा कि महारथी कर्ण युद्धभूमि में सो रहे हैं।
Saying this, the great-armed man-lion Dharmaraja Yudhishthira, riding on a golden chariot drawn by horses having white colour and black tails, as fast as the mind, set out with his army to watch the battle. While discussing and talking with both the brave warriors Shri Krishna and Arjun on matters of his liking, Yudhishthira saw the great man Karna sleeping on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥