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mahabharat 8.96.32-33h: गोविन्द! मैं मानता हूँ कि आज कर्ण के वध के बाद भीष्म, द्रोण, कर्ण, गौतमवंशी कृपाचार्य तथा उनके बाद आने वाले अन्य अनेक वीर योद्धा आपकी बुद्धि के कारण ही मारे गए हैं।॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  8.96.32-33h 
भीष्मो द्रोणश्च कर्णश्च महात्मा गौतम: कृप:।
अन्ये च बहव: शूरा ये च तेषां पदानुगा:॥ ३२॥
त्वद्‍बुद्‍ध्या निहते कर्णे हता गोविन्द सर्वथा।
 
 
अनुवाद
गोविन्द! मैं मानता हूँ कि आज कर्ण के वध के बाद भीष्म, द्रोण, कर्ण, गौतमवंशी कृपाचार्य तथा उनके बाद आने वाले अन्य अनेक वीर योद्धा आपकी बुद्धि के कारण ही मारे गए हैं।॥19 1/2॥
 
Govind! I believe that Bhishma, Drona, Karna, Kripacharya of the Gautama dynasty and many other valiant warriors who followed them have all been killed due to your wisdom after the killing of Karna today.'॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)