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mahabharat 8.96.31: प्रभु! जब आप युद्ध में अर्जुन के सारथी बने, तब हमें विश्वास हो गया कि हमारी विजय निश्चित है, निश्चित है। हम पराजित नहीं हो सकते॥31॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.96.31 
जयश्चैव ध्रुवोऽस्माकं न त्वस्माकं पराजय:।
यदा त्वं युधि पार्थस्य सारथ्यमुपजग्मिवान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! जब आप युद्ध में अर्जुन के सारथी बने, तब हमें विश्वास हो गया कि हमारी विजय निश्चित है, निश्चित है। हम पराजित नहीं हो सकते॥31॥
 
Prabhu! When you became Arjun's charioteer in the war, we were confident that our victory is certain, it is certain. We cannot be defeated.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)