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mahabharat 8.96.29: महाभाग! परम बुद्धिमान् तत्त्वज्ञ महर्षि श्री कृष्णद्वैपायन ने भी मुझसे बार-बार यही बात कही है॥29॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  8.96.29 
असकृच्चापि मेधावी कृष्णद्वैपायनो मम।
कथामेतां महाभाग कथयामास तत्त्ववित्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाभाग! परम बुद्धिमान् तत्त्वज्ञ महर्षि श्री कृष्णद्वैपायन ने भी मुझसे बार-बार यही बात कही है॥29॥
 
Mahabhaag! The most intelligent philosopher Maharishi Shri Krishnadvaipayana has also repeatedly told me the same thing. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)