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mahabharat 8.96.27: कुरुश्रेष्ठ! इसके बाद धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर ने बाजूबंदों से विभूषित श्रीकृष्ण का दाहिना हाथ हाथ में लेकर श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनों से कहा- 27॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.96.27 
प्रगृह्य च कुरुश्रेष्ठ साङ्गदं दक्षिणं भुजम्।
उवाच धर्मभृत् पार्थ उभौ तौ केशवार्जुनौ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! इसके बाद धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर ने बाजूबंदों से विभूषित श्रीकृष्ण का दाहिना हाथ हाथ में लेकर श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनों से कहा- 27॥
 
Kurushrestha! After this, the righteous king Yudhishthir took the right hand of Shri Krishna adorned with armlets in his hand and said to both Shri Krishna and Arjun - 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)