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mahabharat 8.96.25-26: राजन! ‘कैसा सौभाग्य! कैसा सौभाग्य!’ ऐसा कहकर युधिष्ठिर इस प्रकार बोले- ‘महाबाहु देवकीनन्दन! आपके रहते यह महान कार्य सम्पन्न हुआ, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। पार्थ ने आप जैसे सारथि को पाकर ही बड़े प्रयत्न से उसका वध कर दिया। महाबाहु! आपकी बुद्धि की कृपा से ही यह सब हुआ, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।’॥ 25-26॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  8.96.25-26 
दिष्ट्या दिष्ट्येति राजेन्द्र वाक्यं चेदमुवाच ह।
नैतच्चित्रं महाबाहो त्वयि देवकिनन्दन॥ २५॥
त्वया सारथिना पार्थो यत्नवानहनश्च तम्।
न तच्चित्रं महाबाहो युष्मद्‍बुद्धिप्रसादजम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजन! ‘कैसा सौभाग्य! कैसा सौभाग्य!’ ऐसा कहकर युधिष्ठिर इस प्रकार बोले- ‘महाबाहु देवकीनन्दन! आपके रहते यह महान कार्य सम्पन्न हुआ, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। पार्थ ने आप जैसे सारथि को पाकर ही बड़े प्रयत्न से उसका वध कर दिया। महाबाहु! आपकी बुद्धि की कृपा से ही यह सब हुआ, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।’॥ 25-26॥
 
King! 'What a fortune! What a fortune!' Having said this, Yudhishthira spoke thus-'Mahabahu Devakinandan! It is not surprising that this great task has been accomplished in your presence. As soon as Partha had a charioteer like you, he killed him with great effort. Mahabahu! It is not surprising that this happened due to the grace of your wisdom.'॥ 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)