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mahabharat 8.96.13: उस समय महाराज युधिष्ठिर एक सुन्दर स्वर्णमयी शय्या पर शयन कर रहे थे। वहाँ पहुँचकर दोनों ने बड़े हर्ष से राजा के चरण स्पर्श किये।   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.96.13 
शयानं राजशार्दूलं काञ्चने शयनोत्तमे।
अगृह्णीतां च मुदितौ चरणौ पार्थिवस्य तौ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस समय महाराज युधिष्ठिर एक सुन्दर स्वर्णमयी शय्या पर शयन कर रहे थे। वहाँ पहुँचकर दोनों ने बड़े हर्ष से राजा के चरण स्पर्श किये।
 
At that time, the great king Yudhishthira was sleeping on a beautiful golden bed. On reaching there, both of them touched the feet of the king with great joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)