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mahabharat 8.95.11: यहाँ तक कि रथियों में श्रेष्ठ राजा शल्य भी, जिनकी ध्वजा कट गई थी, अपने रथ पर सवार होकर दसों दिशाओं में देखते हुए शिविर की ओर चले ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 8.95: कौरव-सेनाका शिबिरकी ओर पलायन और शिबिरोंमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 95: कौरव-सेनाका शिबिरकी ओर पलायन और शिबिरोंमें प्रवेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.95.11 
छिन्नध्वजेन शल्यस्तु रथेन रथिनां वर:।
प्रययौ शिबिरायैव वीक्षमाणो दिशो दश॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यहाँ तक कि रथियों में श्रेष्ठ राजा शल्य भी, जिनकी ध्वजा कट गई थी, अपने रथ पर सवार होकर दसों दिशाओं में देखते हुए शिविर की ओर चले ॥11॥
 
Even king Shalya, the best of charioteers, whose flag had been cut, proceeded towards the camp in his chariot, looking in all the ten directions. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)