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mahabharat 8.94.7: हाथियों की सूंड और शरीर टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं। कई हाथी ज़मीन पर गिरकर काँप रहे हैं, कई के दाँत टूट गए हैं और वे दर्द से तड़प रहे हैं, खून थूक रहे हैं और दर्द से तड़प रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.94.7 
गजैर्निकृत्तैर्वरहस्तगात्रै-
रुद्वेपमानै: पतितै: पृथिव्याम्।
विशीर्णदन्तै: क्षतजं वमद्भि:
स्फुरद्भिरार्तै: करुणं नदद्भि:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हाथियों की सूंड और शरीर टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं। कई हाथी ज़मीन पर गिरकर काँप रहे हैं, कई के दाँत टूट गए हैं और वे दर्द से तड़प रहे हैं, खून थूक रहे हैं और दर्द से तड़प रहे हैं।
 
The elephants' trunks and bodies have been torn to pieces. Many elephants have fallen on the ground and are trembling, many have lost their teeth and are writhing in pain, spitting blood and writhing in pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)