श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  8.94.67 
तौ देवगन्धर्वमनुष्यचारणै-
र्महर्षिभिर्यक्षमहोरगैरपि।
जयाभिवृद्‍ध्या परयाभिपूजितौ
हते तु कर्णे परमाहवे तदा॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उस महासमर में कर्ण के मारे जाने पर देवता, गन्धर्व, मनुष्य, भाट, महर्षि, यक्ष और बड़े-बड़े सर्प भी उन दोनों का बड़ी श्रद्धा से सत्कार करते हुए कहने लगे, ‘तुम्हारी जय हो, तुम बढ़ो’॥67॥
 
After Karna was killed in that great battle, gods, Gandharvas, humans, bards, Maharishis, Yakshas and even big snakes honored both of them with great reverence, saying 'Victory to you, may you increase'. 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)