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श्लोक  8.94.60 
पाञ्चजन्यस्य निर्घोषो देवदत्तस्य चोभयो:।
पृथिवीं चान्तरिक्षं च दिशश्चैवान्वनादयत्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
पांचजन्य और देवदत्त नामक दो शंखों की गम्भीर ध्वनि से पृथ्वी, आकाश और समस्त दिशाएँ गुंजायमान हो उठीं।
 
The deep sound of the two conches, Panchajanya and Devadatta, made the earth, sky and all directions resonate. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)