Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.94.45: जो किसी वस्तु के माँगने पर सदैव 'मैं दूँगा' कहता था। जो बड़े-बड़े याचकों के माँगने पर कभी 'नहीं' नहीं कहता था, वह पुण्यात्मा कर्ण द्वारथ युद्ध में मारा गया ॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ददानीत्येव योऽवोचन्न नास्तीत्यर्थितोऽर्थिभि:।
सद्भि: सदा सत्पुरुष: स हतो द्वैरथे वृष:॥ ४५॥
अनुवाद
जो किसी वस्तु के माँगने पर सदैव 'मैं दूँगा' कहता था। जो बड़े-बड़े याचकों के माँगने पर कभी 'नहीं' नहीं कहता था, वह पुण्यात्मा कर्ण द्वारथ युद्ध में मारा गया ॥ 45॥
He who always said, "I will give" when asked for something. He who never said "no" when asked by great supplicants, that virtuous Karna was killed in the Dwarath war. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥