श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  8.94.37 
चारुवेषधरं वीरं चारुमौलिशिरोधरम्।
तन्मुखं सूतपुत्रस्य पूर्णचन्द्रसमद्युति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
सूतपुत्र कर्ण का मुख पूर्ण चन्द्रमा के समान तेजस्वी था। वह सुन्दर वेषभूषा पहने हुए था। वह वीर सौन्दर्य से परिपूर्ण था। उसका मस्तक और ग्रीवा भी सुन्दर थे। 37॥
 
The face of Suta's son Karna was as radiant as the full moon. He was wearing a beautiful attire. He was full of heroic beauty. His head and neck were also beautiful. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)