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mahabharat 8.94.35: महाराज! जैसे अन्य जंगली पशु सिंह से सदैव भयभीत रहते हैं, उसी प्रकार युद्धभूमि में मारे गए सारथीपुत्र से समस्त योद्धा भयभीत थे॥35॥   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.94.35 
हतस्यापि महाराज सूतपुत्रस्य संयुगे।
वित्रेसु: सर्वतो योधा: सिंहस्येवेतरे मृगा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जैसे अन्य जंगली पशु सिंह से सदैव भयभीत रहते हैं, उसी प्रकार युद्धभूमि में मारे गए सारथीपुत्र से समस्त योद्धा भयभीत थे॥35॥
 
Maharaj! Just as other wild animals are always afraid of the lion, in the same way all the warriors were afraid of the son of a charioteer who was killed on the battlefield. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)