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mahabharat 8.94.29: कर्ण का शरीर गाण्डीव धनुष से छोड़े गए स्वर्ण-पंखों वाले बाणों से छिदा हुआ था, जो एक चट्टान पर तीखे किए गए थे। उन बाणों के पंख रक्त से सने हुए थे। युद्धभूमि में मृत पड़ा कर्ण अब भी पंखों वाले सूर्य के समान शोभायमान था।   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  8.94.29 
गाण्डीवमुक्तैस्तु सुवर्णपुङ्खै:
शिलाशितै: शोणितदिग्धवाजै:।
शरैश्चिताङ्गो युधि भाति कर्णो
हतोऽपि सन् सूर्य इवांशुमाली॥ २९॥
 
 
अनुवाद
कर्ण का शरीर गाण्डीव धनुष से छोड़े गए स्वर्ण-पंखों वाले बाणों से छिदा हुआ था, जो एक चट्टान पर तीखे किए गए थे। उन बाणों के पंख रक्त से सने हुए थे। युद्धभूमि में मृत पड़ा कर्ण अब भी पंखों वाले सूर्य के समान शोभायमान था।
 
Karna's body was pierced with golden-feathered arrows shot from the Gandiva bow and sharpened on a rock. The wings of those arrows were soaked in blood. Karna, lying dead on the battlefield, was still looking as beautiful as the Sun with wings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)