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mahabharat 8.94.15: उन पर रखे हुए अस्त्र-शस्त्र सब गिर गए हैं। सारा सामान नष्ट हो गया है। धनुष की डोरियाँ, तरकस और रस्सियाँ - ये सब नष्ट हो गए हैं। उन रथों के आसन टूट गए हैं। सुवर्ण और रत्नों से विभूषित उन रथों से आच्छादित पृथ्वी शरद ऋतु के मेघों से आच्छादित आकाश के समान प्रतीत हो रही है॥15॥   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.94.15 
विमुक्तशस्त्रैश्च तथा व्युपस्करै-
र्हतानुकर्षैर्विनिषङ्गबन्धनै:।
प्रभग्ननीडैर्मणिहेमभूषितै:
स्तृता मही द्यौरिव शारदैर्घनै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उन पर रखे हुए अस्त्र-शस्त्र सब गिर गए हैं। सारा सामान नष्ट हो गया है। धनुष की डोरियाँ, तरकस और रस्सियाँ - ये सब नष्ट हो गए हैं। उन रथों के आसन टूट गए हैं। सुवर्ण और रत्नों से विभूषित उन रथों से आच्छादित पृथ्वी शरद ऋतु के मेघों से आच्छादित आकाश के समान प्रतीत हो रही है॥15॥
 
The weapons that were placed on them have all fallen away. All the equipment has been destroyed. The bowstrings, quivers and binding ropes - all of these have been destroyed. The seats of those chariots are broken. The earth covered by those chariots decorated with gold and gems looks like the sky covered with autumn clouds.॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)