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mahabharat 8.94.13: हे नरेन्द्र! अर्जुन और कर्ण के बाणों से मारे गए हाथी, घोड़े और मनुष्यों तथा बाणों से नष्ट होकर गिरे हुए रथों के कारण इस पृथ्वी पर चलना असंभव हो गया है॥ 13॥   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.94.13 
हतैर्मनुष्याश्वगजैश्च संख्ये
शरापविद्धैश्च रथैर्नरेन्द्र।
धनंजयस्याधिरथेश्च मार्गणै-
रगम्यरूपा वसुधा बभूव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे नरेन्द्र! अर्जुन और कर्ण के बाणों से मारे गए हाथी, घोड़े और मनुष्यों तथा बाणों से नष्ट होकर गिरे हुए रथों के कारण इस पृथ्वी पर चलना असंभव हो गया है॥ 13॥
 
O Narendra! It has become impossible to move around on this earth because of the elephants, horses and men killed by the arrows of Arjun and Karna and the chariots lying fallen after being destroyed by the arrows.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)