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mahabharat 8.94.10: बाणों से घायल होकर आकाश से गिरे हुए हजारों महारथी योद्धा अत्यंत उज्ज्वल एवं स्वच्छ प्रकाश से प्रकाशित लोकों के समान दिखाई देते हैं और रात्रि के समय उनसे आच्छादित भूमि उन लोकों से व्याप्त आकाश के समान शोभायमान हो जाती है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.94.10 
शरप्रहाराभिहतैर्महाबलै-
रवेक्ष्यमाणै: पतितै: सहस्रश:।
दिवश्च्युतैर्भूरतिदीप्तमद्भि-
र्नक्तं ग्रहैर्द्यौरमलप्रदीप्तै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
बाणों से घायल होकर आकाश से गिरे हुए हजारों महारथी योद्धा अत्यंत उज्ज्वल एवं स्वच्छ प्रकाश से प्रकाशित लोकों के समान दिखाई देते हैं और रात्रि के समय उनसे आच्छादित भूमि उन लोकों से व्याप्त आकाश के समान शोभायमान हो जाती है॥10॥
 
Thousands of mighty warriors, wounded by the arrows, fallen down from the sky, appear like planets illuminated with extremely bright and clear light, and the land covered with them, at night, becomes beautiful like the sky permeated with those planets. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)