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mahabharat 8.93.9: उनके उपकरण और कवच गिर गए थे। वे इतने अचेत थे कि यह भी नहीं सोच पा रहे थे कि किस दिशा में भागें। वे एक-दूसरे को कुचल रहे थे और भयभीत होकर इधर-उधर देख रहे थे॥9॥   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  8.93.9 
विस्रस्तयन्त्रकवचा: कांदिग्भूता विचेतस:।
अन्योन्यमवमृद्नन्तो वीक्षमाणा भयार्दिता:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उनके उपकरण और कवच गिर गए थे। वे इतने अचेत थे कि यह भी नहीं सोच पा रहे थे कि किस दिशा में भागें। वे एक-दूसरे को कुचल रहे थे और भयभीत होकर इधर-उधर देख रहे थे॥9॥
 
Their equipment and armour had fallen off. They were so unconscious that they could not even think in which direction to run. They were trampling each other and looking around in fear.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)