संजय उवाच
एवं ब्रुवति पुत्रे ते सैनिका भृशविक्षता:।
अनवेक्ष्यैव तद्वाक्यं प्राद्रवन् सर्वतो दिश:॥ ६०॥
अनुवाद
संजय ने कहा, "महाराज, आपका पुत्र इसी प्रकार उपदेश देता रहा; किन्तु बुरी तरह घायल सैनिक उसकी बातों पर ध्यान दिए बिना ही चारों ओर भाग गए।"
Sanjaya said, "Maharaj, your son continued to lecture in this manner; but the badly wounded soldiers fled in all directions without paying any attention to what he was saying." 60.
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कौरवसैन्यपलायने त्रिनवतितमोऽध्याय:॥ ९३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें कौरवसेनाका पलायनविषयक तिरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥