श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  8.93.59 
न ह्यधर्मोऽस्ति पापीयान् क्षत्रियस्य पलायनात्।
न युद्धधर्माच्छ्रेयो हि पन्था: स्वर्गस्य कौरवा:।
अचिरेण हता लोकान् सद्यो योधा: समश्नुत॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
हे कौरव योद्धाओं! क्षत्रिय के लिए युद्ध से पीठ फेरकर भाग जाने से बड़ा कोई पाप नहीं है। युद्ध के नियमों का पालन करने से बढ़कर स्वर्ग प्राप्ति का कोई उत्तम मार्ग नहीं है। इसलिए हे वीरों! तुम्हें युद्ध में मरकर शीघ्र ही परम लोकों के सुखों को भोगना चाहिए।॥59॥
 
O warriors of Kauravas! There is no greater sin for a Kshatriya than to turn his back and run away from a battle. There is no better way to attain heaven than to follow the rules of war. Therefore, O warriors! You should die in battle and soon experience the pleasures of the higher realms.'॥ 59॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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