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mahabharat 8.93.56-57: हे सब वीर क्षत्रियों, जो यहाँ एकत्र हुए हैं, ध्यानपूर्वक सुनो। जब समस्त प्राणियों का नाश करने वाले यमराज वीर और कायर दोनों को मार डालते हैं, तब ऐसा मूर्ख कौन होगा जो मेरे समान क्षत्रिय होकर भी युद्ध न करे?॥ 56-57॥   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 56-57
 
 
श्लोक  8.93.56-57 
शृणुध्वं क्षत्रिया: सर्वे यावन्त: स्थ समागता:॥ ५६॥
यदा शूरं च भीरुं च मारयत्यन्तको यम:।
को नु मूढो न युध्येत मादृश: क्षत्रियव्रत:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे सब वीर क्षत्रियों, जो यहाँ एकत्र हुए हैं, ध्यानपूर्वक सुनो। जब समस्त प्राणियों का नाश करने वाले यमराज वीर और कायर दोनों को मार डालते हैं, तब ऐसा मूर्ख कौन होगा जो मेरे समान क्षत्रिय होकर भी युद्ध न करे?॥ 56-57॥
 
‘All you brave Kshatriyas who have gathered here, listen carefully. When the destroyer of all living beings, Yamraj, kills both the brave and the cowardly, then who would be so foolish as to not fight even though he is a Kshatriya like me?॥ 56-57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)