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mahabharat 8.93.44-45h: महाराज! जब संसार में अंधकार छा गया और पृथ्वी पर धूल उड़ने लगी, तब आपके सभी योद्धा भयभीत होकर भाग गए।   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  8.93.44-45h 
अन्धकारीकृते लोके रजोभूते महीतले॥ ४४॥
योधा: सर्वे महाराज तावका: प्राद्रवन् भयात्।
 
 
अनुवाद
महाराज! जब संसार में अंधकार छा गया और पृथ्वी पर धूल उड़ने लगी, तब आपके सभी योद्धा भयभीत होकर भाग गए।
 
Maharaj! When darkness engulfed the world and dust started flying on the earth, all your warriors got frightened and ran away. 44 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)