vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास
»
श्लोक 43-44h
श्लोक
8.93.43-44h
तत एनाञ्शरव्रातै: सहसा समवाकिरत्॥ ४३॥
तमसा संवृतेनाथ न स्म किंचिद् व्यदृश्यत।
अनुवाद
उसने अचानक अपने बाणों से उन सबको ढक दिया। उस समय चारों ओर अंधकार छा गया, अतः कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
He suddenly covered them all with his arrows. At that time darkness spread everywhere; hence nothing could be seen. 43 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×