श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  8.93.33-34h 
कृष्णसारथिमायान्तं दृष्ट्वा श्वेतहयं रथम्॥ ३३॥
अर्जुनं चापि योद्धारं त्वदीया: प्राद्रवन् भयात्।
 
 
अनुवाद
श्वेत घोड़ों से जुते हुए रथ और श्रीकृष्ण के सारथि अर्जुन जैसे योद्धा को आते देख आपके सैनिक भयभीत होकर भागने लगे।
 
Seeing the chariot drawn by white horses and a warrior like Arjuna approaching, whose charioteer is Shri Krishna, your soldiers began to flee in fear. 33 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)