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mahabharat 8.93.32-33h: हे प्रभु! अर्जुन भी आपकी रथसेना के पास जाकर तीनों लोकों में प्रसिद्ध गाण्डीव धनुष को घुमाने लगा।   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  8.93.32-33h 
धनंजयोऽपि चाभ्येत्य रथानीकं तव प्रभो॥ ३२॥
विश्रुतं त्रिषु लोकेषु गाण्डीवं व्याक्षिपद् धनु:।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! अर्जुन भी आपकी रथसेना के पास जाकर तीनों लोकों में प्रसिद्ध गाण्डीव धनुष को घुमाने लगा।
 
Lord! Arjuna too went near your chariot army and started twirling the Gandiva bow, famous in the three worlds. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)