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mahabharat 8.93.30-31h: उधर, वीर अर्जुन ने रथ सेना पर आक्रमण कर दिया। माद्री के पुत्र नकुल, सहदेव तथा महारथी सात्यकि ने हर्ष में भरकर शकुनि पर बड़े बल से आक्रमण किया और दुर्योधन की सेना का संहार कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  8.93.30-31h 
धनंजयो रथानीकमभ्यवर्तत वीर्यवान्।
माद्रीपुत्रौ तु शकुनिं सात्यकिश्च महारथ:॥ ३०॥
जवेनाभ्यपतन् हृष्टा घ्नन्तो दौर्योधनं बलम्।
 
 
अनुवाद
उधर, वीर अर्जुन ने रथ सेना पर आक्रमण कर दिया। माद्री के पुत्र नकुल, सहदेव तथा महारथी सात्यकि ने हर्ष में भरकर शकुनि पर बड़े बल से आक्रमण किया और दुर्योधन की सेना का संहार कर दिया।
 
On the other side, the valiant Arjuna attacked the chariot army. Madri's sons Nakula and Sahadeva and the mighty charioteer Satyaki, filled with joy, attacked Shakuni with great force, destroying Duryodhan's army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)