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mahabharat 8.93.26: वे पैदल सैनिक भी अपने प्राणों को त्यागकर युद्धस्थल में भीमसेन की ओर उसी प्रकार दौड़े, जैसे पतंगे अग्नि की ओर दौड़ते हैं॥26॥   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  8.93.26 
पदातिनोऽपि संत्यज्य प्रियं जीवितमात्मन:।
भीममभ्यद्रवन् संख्ये पतङ्गा ज्वलनं यथा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वे पैदल सैनिक भी अपने प्राणों को त्यागकर युद्धस्थल में भीमसेन की ओर उसी प्रकार दौड़े, जैसे पतंगे अग्नि की ओर दौड़ते हैं॥26॥
 
Those infantrymen, too, abandoning their dear lives, ran towards Bhimasena on the battlefield like kites rushing towards a fire.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)