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mahabharat 8.93.24: कुन्तीपुत्र भीमसेन युद्ध के नियमों का पालन करने वाले थे, इसलिए उन्होंने स्वयं रथ पर बैठकर भूमि पर खड़े पैदल सैनिकों से युद्ध नहीं किया। उन्हें अपने बाहुबल पर पूरा विश्वास था॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.93.24 
न तान् रथस्थो भूमिष्ठान् धर्मापेक्षी वृकोदर:।
योधयामास कौन्तेयो भुजवीर्यव्यपाश्रय:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र भीमसेन युद्ध के नियमों का पालन करने वाले थे, इसलिए उन्होंने स्वयं रथ पर बैठकर भूमि पर खड़े पैदल सैनिकों से युद्ध नहीं किया। उन्हें अपने बाहुबल पर पूरा विश्वास था॥ 24॥
 
Kunti's son Bhimasena was a follower of the rules of war, so he himself did not fight with the infantrymen standing on the ground while sitting on a chariot. He had full faith in his physical strength.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)