Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.93.18: आज मुझे अर्जुन, श्रीकृष्ण, उस अभिमानी भीमसेन और शेष शत्रुओं को अवश्य मारना चाहिए, तभी मैं कर्ण के ऋण से मुक्त हो सकता हूँ।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.93.18 
अद्यार्जुनं सगोविन्दं मानिनं च वृकोदरम्।
हन्यां शिष्टांस्तथा शत्रून् कर्णस्यानृण्यमाप्नुयाम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आज मुझे अर्जुन, श्रीकृष्ण, उस अभिमानी भीमसेन और शेष शत्रुओं को अवश्य मारना चाहिए, तभी मैं कर्ण के ऋण से मुक्त हो सकता हूँ।॥18॥
 
Today I must kill Arjun, Shri Krishna, that arrogant Bhimasena and the remaining enemies, only then I can be freed from Karna's debt.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)