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mahabharat 8.93.15: महाराज! उस समय भीमसेन के भय से अपने सब योद्धाओं को भागते देखकर दुर्योधन व्याकुल होकर चिल्लाया और अपने सारथि से बोला -॥15॥   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.93.15 
सम्प्रेक्ष्य द्रवत: सर्वान् भीमसेनभयार्दितान्।
दुर्योधनोऽथ स्वं सूतं हा हा कृत्वेदमब्रवीत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय भीमसेन के भय से अपने सब योद्धाओं को भागते देखकर दुर्योधन व्याकुल होकर चिल्लाया और अपने सारथि से बोला -॥15॥
 
Maharaj! At that time, seeing all his warriors running away in fear of Bhimasena, Duryodhana cried out in distress and said to his charioteer -॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)