Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.93.14: जैसे सवार मारे गए हाथी और हाथ कटे हुए मनुष्य ऐसी ही दुर्दशा में पड़ जाते हैं, वैसे ही भयभीत हुए हुए समस्त कौरव अर्जुन से भरे हुए सम्पूर्ण जगत को देखने लगे॥14॥   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.93.14 
हतारोहा यथा नागाश्छिन्नहस्ता यथा नरा:।
सर्वे पार्थमयं लोकं सम्पश्यन्तो भयार्दिता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जैसे सवार मारे गए हाथी और हाथ कटे हुए मनुष्य ऐसी ही दुर्दशा में पड़ जाते हैं, वैसे ही भयभीत हुए हुए समस्त कौरव अर्जुन से भरे हुए सम्पूर्ण जगत को देखने लगे॥14॥
 
Just as elephants whose riders have been killed and human beings whose hands have been chopped off fall into a similar plight, all the Kauravas, afflicted with fear, began to see the entire world filled with Arjuna. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)