Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.93.13: राजन! जैसे सर्पों, चोरों और लुटेरों से भरे हुए वन में अपने समूह से बिछुड़ा हुआ मनुष्य अनाथ हो जाता है और महान संकट में पड़ जाता है, वैसे ही सूतपुत्र कर्ण के मारे जाने पर आपके योद्धाओं की भी यही दशा हुई॥ 13॥ | mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! जैसे सर्पों, चोरों और लुटेरों से भरे हुए वन में अपने समूह से बिछुड़ा हुआ मनुष्य अनाथ हो जाता है और महान संकट में पड़ जाता है, वैसे ही सूतपुत्र कर्ण के मारे जाने पर आपके योद्धाओं की भी यही दशा हुई॥ 13॥
King! Just as a person separated from his group in a forest infested with snakes and thieves and plunderers becomes orphan and falls into great trouble, your warriors too met with the same fate after the death of Suta's son Karna.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥