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mahabharat 8.93.1: धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! कर्ण और अर्जुन के उस युद्ध में, जब सबके लिए भयंकर दिन आ गया था, बाणों की अग्नि में जलती हुई और विक्षिप्त होकर भागती हुई कौरव सेना और संजय सेना की क्या दशा थी?   |   mahabharat अध्याय 8.93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 93: भीमसेनद्वारा पचीस हजार पैदल सैनिकोंका वध, अर्जुनद्वारा रथसेनाका विध्वंस, कौरव-सेनाका पलायन और दुर्योधनका उसे रोकनेके लिये विफल प्रयास  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.93.1 
धृतराष्ट्र उवाच
तस्मिंस्तु कर्णार्जुनयोर्विमर्दे
दग्धस्य रौद्रेऽहनि विद्रुतस्य।
बभूव रूपं कुरुसृञ्जयानां
बलस्य बाणोन्मथितस्य कीदृक्॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! कर्ण और अर्जुन के उस युद्ध में, जब सबके लिए भयंकर दिन आ गया था, बाणों की अग्नि में जलती हुई और विक्षिप्त होकर भागती हुई कौरव सेना और संजय सेना की क्या दशा थी?
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! In that battle between Karna and Arjun, when a dreadful day had come for everyone, what was the condition of the Kaurava army and the Sanjaya army that were burning in the fire of arrows and running away madly?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)