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mahabharat 8.92.7: राजन! इसी प्रकार समस्त सोमक और संजय भी शंख बजाते हुए एक-दूसरे का आलिंगन करने लगे। उस समय पाण्डव सेना के समस्त क्षत्रिय सूतपुत्र की मृत्यु पर हर्ष मना रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.92: कौरवोंका शोक, भीम आदि पाण्डवोंका हर्ष, कौरव-सेनाका पलायन और दु:खित शल्यका दुर्योधनको सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 92: कौरवोंका शोक, भीम आदि पाण्डवोंका हर्ष, कौरव-सेनाका पलायन और दु:खित शल्यका दुर्योधनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.92.7 
तथैव राजन् सोमका: सृञ्जयाश्च
शङ्खान् दध्मु: सस्वजुश्चापि सर्वे।
परस्परं क्षत्रिया हृष्टरूपा:
सूतात्मजे वै निहते तदानीम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजन! इसी प्रकार समस्त सोमक और संजय भी शंख बजाते हुए एक-दूसरे का आलिंगन करने लगे। उस समय पाण्डव सेना के समस्त क्षत्रिय सूतपुत्र की मृत्यु पर हर्ष मना रहे थे।
 
King! Similarly all the Somakas and Sanjayas also started blowing their conches and embracing each other. At that time all the Kshatriyas of the Pandava army were rejoicing over the death of Suta's son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)