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mahabharat 8.92.12: ‘निश्चय ही भगवान् कुन्तीपुत्रों के अधीन होकर कार्य कर रहे हैं; क्योंकि वे पाण्डवों की रक्षा करते हैं और हमारा संहार करते हैं। यही कारण है कि आपके उद्देश्य की प्राप्ति हेतु प्रयत्न करने वाले प्रायः सभी वीर शत्रुओं द्वारा बलपूर्वक मारे गए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 8.92: कौरवोंका शोक, भीम आदि पाण्डवोंका हर्ष, कौरव-सेनाका पलायन और दु:खित शल्यका दुर्योधनको सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 92: कौरवोंका शोक, भीम आदि पाण्डवोंका हर्ष, कौरव-सेनाका पलायन और दु:खित शल्यका दुर्योधनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.92.12 
दैवं ध्रुवं पार्थवशात् प्रवृत्तं
यत् पाण्डवान् पाति हिनस्ति चास्मान्।
तवार्थसिद्धॺर्थकरास्तु सर्वे
प्रसह्य वीरा निहता द्विषद्भि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘निश्चय ही भगवान् कुन्तीपुत्रों के अधीन होकर कार्य कर रहे हैं; क्योंकि वे पाण्डवों की रक्षा करते हैं और हमारा संहार करते हैं। यही कारण है कि आपके उद्देश्य की प्राप्ति हेतु प्रयत्न करने वाले प्रायः सभी वीर शत्रुओं द्वारा बलपूर्वक मारे गए॥12॥
 
‘Surely the God is working under the control of the sons of Kunti; because he protects the Pandavas and destroys us. This is the reason why almost all the brave men who tried to achieve your goal were killed forcefully by the enemies.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)