Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.91.9-10h: (याद करो, तुमने द्रौपदी से कहा था) 'कृष्ण! पाण्डवों का नाश हो गया, वे सदा के लिए नरक में चले गए। अब तुम्हें दूसरा पति चुन लेना चाहिए। जब ​​तुम यह सब कह रहे थे और द्रौपदी को आँखें फाड़कर देख रहे थे, उस समय तुम्हारा धर्म कहाँ चला गया था?॥9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  8.91.9-10h 
विनष्टा: पाण्डवा: कृष्णे शाश्वतं नरकं गता:।
पतिमन्यं वृणीष्वेति वदंस्त्वं गजगामिनीम्॥ ९॥
उपप्रेक्षसि राधेय क्व ते धर्मस्तदा गत:।
 
 
अनुवाद
(याद करो, तुमने द्रौपदी से कहा था) 'कृष्ण! पाण्डवों का नाश हो गया, वे सदा के लिए नरक में चले गए। अब तुम्हें दूसरा पति चुन लेना चाहिए। जब ​​तुम यह सब कह रहे थे और द्रौपदी को आँखें फाड़कर देख रहे थे, उस समय तुम्हारा धर्म कहाँ चला गया था?॥9 1/2॥
 
(Remember, you said to Draupadi) 'Krishna! The Pandavas are destroyed, they have gone to hell forever. Now you should choose another husband. When you were saying all this and staring at Draupadi with her eyes wide open, where did your Dharma go at that time?॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)