Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.91.54-55: महाबली कर्ण का वह विशाल शरीर बाणों से घायल होकर, घावों से रक्त बहता हुआ, निर्जीव होकर गिर पड़ा, मानो वज्र से खंडित पर्वत की विशाल चोटी से गेरू मिश्रित जल की धारा फूट रही हो। पृथ्वी पर गिरे हुए कर्ण के शरीर से एक तेज निकला, जो आकाश में फैल गया और ऊपर जाकर सूर्य में विलीन हो गया। | mahabharat अध्याय 8.91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाबली कर्ण का वह विशाल शरीर बाणों से घायल होकर, घावों से रक्त बहता हुआ, निर्जीव होकर गिर पड़ा, मानो वज्र से खंडित पर्वत की विशाल चोटी से गेरू मिश्रित जल की धारा फूट रही हो। पृथ्वी पर गिरे हुए कर्ण के शरीर से एक तेज निकला, जो आकाश में फैल गया और ऊपर जाकर सूर्य में विलीन हो गया।
That tall body of the illustrious Karna fell lifeless, wounded by arrows and bleeding profusely from his wounds, as if a huge peak of a mountain shattered by a thunderbolt was gushing out a stream of water mixed with ochre. A radiance emanated from the body of Karna who had fallen on the earth, spread in the sky and went up and merged with the sun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥