श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  8.91.45 
ततस्तु तं वै शरमप्रमेयं
गाण्डीवधन्वा धनुषि व्ययोजयत्।
युक्त्वा महास्त्रेण परेण चापं
विकृष्य गाण्डीवमुवाच सत्वरम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् गाण्डीवधारी अर्जुन ने उस अत्यन्त शक्तिशाली बाण को अपने धनुष पर चढ़ाया और उस श्रेष्ठ एवं महान दिव्यास्त्र से उसे अभिमंत्रित करके तुरन्त ही गाण्डीव को खींचकर कहा - ॥45॥
 
Thereafter, Arjuna wielding Gandiva placed that immeasurably powerful arrow on his bow and after conjuring it with the best and great divine weapon, immediately pulling Gandiva, he said – ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)