Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.91.36: वह विश्वविख्यात ध्वज आपकी सेना की विजय का स्तम्भ था और शत्रुओं को सदैव भयभीत करता था। उसका स्वरूप प्रशंसा के योग्य था। अपनी प्रभा से वह सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि के समान था। 36।   |   mahabharat अध्याय 8.91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  8.91.36 
जयास्पदं तव सैन्यस्य नित्य-
ममित्रवित्रासनमीडॺरूपम्।
विख्यातमादित्यसमं स्म लोके
त्विषा समं पावकभानुचन्द्रै:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वह विश्वविख्यात ध्वज आपकी सेना की विजय का स्तम्भ था और शत्रुओं को सदैव भयभीत करता था। उसका स्वरूप प्रशंसा के योग्य था। अपनी प्रभा से वह सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि के समान था। 36।
 
That world-famous flag was the pillar of victory of your army and always frightened the enemies. Its appearance was worthy of praise. With its radiance, it was comparable to the sun, moon and fire. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)