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mahabharat 8.91.34: तब अर्जुन ने 'बहुत अच्छा' कहकर भगवान की आज्ञा को आदरपूर्वक स्वीकार किया और जिस प्रज्वलित बाण का पहिया धंसा हुआ था, उसे हाथ में लेकर उसने कर्ण के विशाल रथ पर लहराती हुई सूर्य के समान चमकती हुई ध्वजा पर प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 8.91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  8.91.34 
तथैव सम्पूज्य स तद् वच: प्रभो-
स्तत: शरं प्रज्वलितं प्रगृह्य।
जघान कक्षाममलार्कवर्णां
महारथे रथचक्रे विमग्ने॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने 'बहुत अच्छा' कहकर भगवान की आज्ञा को आदरपूर्वक स्वीकार किया और जिस प्रज्वलित बाण का पहिया धंसा हुआ था, उसे हाथ में लेकर उसने कर्ण के विशाल रथ पर लहराती हुई सूर्य के समान चमकती हुई ध्वजा पर प्रहार किया।
 
Then saying 'Very good', Arjuna respectfully accepted the Lord's command and taking in his hand the blazing arrow whose wheel was stuck, he struck the sun-shining flag fluttering on Karna's huge chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)