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mahabharat 8.91.22: तत्पश्चात् कुन्तीकुमार ने कर्ण पर लक्ष्य करके एक और दिव्यास्त्र चलाया जो जातवेद अग्नि का प्रिय अस्त्र था। वह अग्निबाण उसके तेज से प्रज्वलित हो उठा। 22॥   |   mahabharat अध्याय 8.91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 91: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको चेतावनी देना और कर्णका वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.91.22 
ततोऽन्यदस्त्रं कौन्तेयो दयितं जातवेदस:।
मुमोच कर्णमुद्दिश्य तत् प्रजज्वाल तेजसा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कुन्तीकुमार ने कर्ण पर लक्ष्य करके एक और दिव्यास्त्र चलाया जो जातवेद अग्नि का प्रिय अस्त्र था। वह अग्निबाण उसके तेज से प्रज्वलित हो उठा। 22॥
 
Thereafter, Kuntikumar used another divine weapon aiming at Karna which was the favorite weapon of Jatveda Agni. That firearm ignited with its brilliance. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)