Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.98: इसके अलावा, नौवें, दसवें और ग्यारहवें तार काटने के बाद भी, सौ बाण चलाने वाले कर्ण को यह पता नहीं चला कि अर्जुन के धनुष में सौ तार हैं। | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नवमीं दशमीं चास्य तथा चैकादशीं वृष:।
ज्याशतं शतसंधान: स कर्णो नावबुध्यते॥ ९८॥
अनुवाद
इसके अलावा, नौवें, दसवें और ग्यारहवें तार काटने के बाद भी, सौ बाण चलाने वाले कर्ण को यह पता नहीं चला कि अर्जुन के धनुष में सौ तार हैं।
Moreover, even after cutting the ninth, tenth and eleventh strings, Karna, who had aimed a hundred arrows, did not know that Arjuna's bow had a hundred strings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥