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mahabharat 8.90.92: शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन ने गाण्डीव धनुष, प्रत्यंचा और बाणों का आवाहन करके, जैसे इन्द्र जल बरसाते हैं, वैसे ही बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी॥ 92॥   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  8.90.92 
गाण्डीवं ज्यां च बाणांश्च सोऽनुमन्त्र्य परंतप:।
व्यसृजच्छरवर्षाणि वर्षाणीव पुरन्दर:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन ने गाण्डीव धनुष, प्रत्यंचा और बाणों का आवाहन करके, जैसे इन्द्र जल बरसाते हैं, वैसे ही बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी॥ 92॥
 
Arjuna, the tormentor of enemies, having invoked the Gandiva bow, bowstring and arrows, began a shower of arrows just as Indra rains water.॥ 92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)